Friday, 30 December 2022

कङवा सच

अगर कोई मंदिर गिर जाए तो घबराने की कोई बात नहीं है। भले ही कोई मस्जिद गिर जाए हां-हमलों के साथ खिलवाड़ करने की जरूरत नहीं है। मंदिर-मस्जिद सैकड़ों गुना हैं उठेगा और गिरेगा; लेकिन अगर इंसानियत का मंदिर टूट जाए तो उसे दोबारा बनाने की ताकत किसी में नहीं है। क्या मिट्टी, ईंट-चूने और सीमेंट की कीमत इंसानियत की ईंट, चरित्र के चूने और सच्चाई के सीमेंट से ज्यादा है?

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अगर कोई मंदिर गिर जाए तो घबराने की कोई बात नहीं है। भले ही कोई मस्जिद गिर जाए हां-हमलों के साथ खिलवाड़ करने की जरूरत नहीं है। मंदिर-मस्...